Skip to main content

Posts

प्रीति तट

प्रीति तट ...... प्रेम ! एक यात्रा , इस तट से उस तट तक। अपने हिये से उनके हिय तक .....इस तट मैं हूँ अपने हिय की प्यास लिये , तडप लिये पीडा विरह वेदना लिये ......उस तट केवल प्रियतम और उनका हिय । सब क...

देश काल परे रास लीला

श्रीराधा यह प्रश्न सर्वसाधारण के मन में आना स्वभाविक है , कि जब मात्र 11वर्ष की आयु में श्रीकृष्ण ने श्रीवृंदावन से मथुरा गमन किया , तो गोपियों के संग रास कब किया ?क्या यह कथावा...

छूत को रोग ...

छूत को रोग ... .. हाँ सखि री , जे मयूरमुकुटी का आकर्षण छूत का रोग ही तो ह्वै.....अब कोई आपत्ति मति करियो जी हमपे.....हम साँचि कहे रहे । तुम कहोगे कि कैसे !......तो कहो छूत को रोग कैसे फैले !.......देखन ते ......

सखि विरह

सखि विरह सखि का निज कुछ ह्वै तो वो दोऊ प्राणलाडिले ह्वैं। सखि युगल के ह्रदय का प्रकट स्वरूप  .....युगल का पारस्परिक विरह ही सखि का विरहानल  ......प्राण विकल होवें ह्वैं.....तप्त होते ह...

रस

रस ....... क्या लिखुँ तुम्हारे संबंध में ! क्योंकी वाणी विषय जो नहीं तुम , पर फिर भी जी ललचा रहा कि किंचित तो तुम्हारा परिचय होवे । तो कुछ अपने मन को , कुछ मति को , कुछ हिय को , कुछ शब्दों स...

श्रीयुगल प्रेम तत्व

श्रीयुगल प्रेम तत्व ..... श्रीराधा श्रीकृष्ण प्राप्ति की चिंतामणि श्रीराधिका और श्रीराधिका प्रेम प्राप्ति की चिंतामणि श्रीकृष्ण । समझने में नेक सो कठिन प्रतीत हो सकता पर...

बंसरि ....

बंसरि ....... विचित्र सी अनुभूति हो रही ....संगीत की स्वर लहरी ...आहा !.....कर्णरंध्रों से सीधे अन्तर्मन में उतरती ......बंसरि का यह मधुर स्वर जैसे बाहर शांत हवा के सागर में सुर की तरंगे प्रवाह...